इन पांच व्यक्तियों के बीच मे से भूलकर भी ना निकले

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आचार्य चाणक्य ने अपने नीति-शास्त्र में, जीवन के कई व्यवहारिक बातों के बारे में ज्ञान प्रदान किया है, जिनका अनुसरण करके व्यक्ति कई कठिनाइयों को दूर कर सकता है। इस सूत्र में चाणक्य ने स्पष्ट किया है कि कभी भी इन 5 चीजों के बीच से निकलना उचित नहीं होता है, इसके परिणाम हानिकारक हो सकते हैं।

आचार्य चाणक्य के अनुसार

विप्रयोर्विप्रवह्वेश्र्च दम्पत्योः स्वामिभृतयोः।
अन्तरेण न गन्तव्यं हलस्य वृषभस्य च।।

आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक में यह स्पष्ट किया है कि ऐसे 5 चीजें और लोग हैं, जिनके बीच से निकलना उचित नहीं होता है।

ये पांच इस प्रकार है

दो विद्वानों के बीच से

इस सूत्र में आचार्य कहते हैं कि जब दो ब्राह्मण या विद्वान मिलते हैं, तो वे हमेशा ज्ञान की बातें करते हैं। आपने यह कहावत सुनी होगी कि ‘ज्ञानी से ज्ञानी मिलें, करें ज्ञान की बात’, इसलिए ऐसे समय में, जब दो ज्ञानी आपस में चर्चा कर रहे हों, तो उनके बीच से निकलना उचित नहीं होता है, क्योंकि इससे उनकी चर्चा में बाधा पैदा होती है, और इससे उन्हें कष्ट हो सकता है, इसलिए ऐसे विद्वानों की बातचीत के बीच में से निकलना बहुत अनुचित होता है।

अग्नि और ब्राह्मण के बीच से

इस सूत्र में आचार्य कहते हैं कि कोई भी ब्राह्मणजन अग्नि के समीप बैठकर ही हवन, यज्ञ, पूजन कार्य व अन्य धार्मिक कार्यों को करते हैं, ऐसे समय में अग्नि और ब्राह्मण के बीच से निकलना बहुत बुरा होता है, इससे उनके यज्ञ, हवन व पूजन कार्य में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है, जिसके परिणाम अच्छे नहीं होते हैं, इसलिए किसी स्थान पर यदि अग्नि के समीप ब्राह्मण बैठे हों, तो उनके मध्य से निकलने की गलती नहीं करनी चाहिए।

सेवक और मालिक के बीच से

इस सूत्र में आचार्य का कथन है कि किसी स्थान पर, यदि आप यह देखें कि कोई मालिक अपने सेवक को कोई निर्देश दे रहा हो या उससे कोई चर्चा कर रहा हो, उस समय भी उनके बीच से निकलना उचित नहीं होता है क्योंकि, ऐसे समय में हो सकता है कि वह मालिक अपने नौकर को किसी आवश्यक कार्य के बारे में निर्देश दे रहा हो या कोई आवश्यक बात को समझा रहा हो, इस स्थिति में उनके बीच में से निकलने पर, उनके वार्तालाप में बाधा उत्पन्न हो सकती है, और यह व्यवहार उचित नहीं होता है।

एकांत में बैठे पति-पत्नी के बीच से

इस सूत्र का तात्पर्य है कि पति-पत्नी यदि एकांत में बैठ कर, कोई बात या चर्चा करते हुए दिखाई दें, तो उनके मध्य में से निकलना बहुत अनुचित कार्य होता है, क्योंकि इस स्थिति में पति-पत्नी के बीच के एकांत में व निजी पलों में बाधा पहुंचती है। इस स्थिति में यह संभव है कि पति और पत्नी आपस में कोई निजी वार्तालाप कर रहे हों, या फिर घर-परिवार या अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के बारे में कोई गंभीर चर्चा कर रहे हों, उस समय उनके एकांत को भंग करना या उनके बीच से निकल कर, उनकी चर्चा में बाधा उत्पन्न करना, बहुत ही अनुचित कार्य माना गया है।

बैल और हल के बीच से

इस अंतिम सूत्र का तात्पर्य यह है कि हल और बैल एक साथ जुते हुए हों, और कोई कार्य कर रहे हों, तो उनसे दूर रहना ही उचित होता है, और उनके बीच से निकलने का प्रयास कभी नहीं करना चाहिए, अन्यथा इससे हो सकता है कि आप को चोट लग जाए, और व्यक्ति उस समय हल और बैल के मध्य में फंसकर घायल भी हो सकता है।


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