लोग आपके तलवे चाटेंगे ये 7 काम कर दो

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महान विद्वान, कूटनीतिज्ञ, राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य ने, अपने जीवन के गूढ़ अनुभवों के आधार पर, नीति-शास्त्र, चाणक्य नीति की रचना की है। यह नीति-शास्त्र आने वाली पीढ़ियों के लिए, उनके जीवन के मार्गदर्शन और समस्याओं के निराकरण के लिए बहुत उपयोगी है। इसमें आचार्य ने व्यक्ति की व्यवहारिक जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातों को स्पष्ट किया है, जिसे हमें कभी नहीं भूलना चाहिए। इन बातों को याद रख कर, हम जीवन की समस्याओं का निराकरण कर सकते हैं, और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

कैसे संतुष्ट करें भिन्न व्यक्तियों को?

इस सूत्र में आचार्य कहते हैं कि हमें अपने कार्य सिद्धि के लिए, भिन्न-भिन्न स्वभाव वाले व्यक्तियों को, उनके स्वभाव के अनुकूल व्यवहार के द्वारा ही संतुष्ट किया जाना चाहिए। हमें किसी दुष्ट स्वभाव और कठोर व्यवहार वाले व्यक्ति को हाथ जोड़कर या विनयपूर्वक, किसी अज्ञानी या मूर्ख व्यक्ति को मान-सम्मान, इज्जत देकर, किसी स्वार्थी व लोभी व्यक्ति को धन संपत्ति या वस्तु प्रदान करके और किसी ज्ञानी व्यक्ति को सच बोलकर, संतुष्ट किया जाना उचित होता है।

धनवान का सम्मान

इस सूत्र में आचार्य का कथन है कि इस दुनिया में धन की महिमा सर्वोच्च होती है। धनवान व्यक्ति का ही समाज में सम्मान किया जाता है। सभी उसके मित्र और हितकारी बनना चाहते हैं। धनवान व्यक्ति हर कार्य करने में सक्षम होता है, उसे पंडितों जैसा सम्मान प्राप्त होता है, इसलिए यह सत्य है कि धनवान ही बलवान होता है।

इनके बिना रहना उचित है

व्यवहारिक जीवन से संबंधित सूत्र में, आचार्य चाणक्य के अनुसार, ऐसे व्यक्ति का बिना पत्नी के रहना ज्यादा अच्छा है, जिसकी पत्नी बुरे स्वभाव व खराब चरित्र की हो, ऐसे व्यक्ति को बिना मित्र के रहना उचित है, जिसका कोई मित्र दुष्ट, अधर्मी व नीच स्वभाव का हो, इसी प्रकार किसी मूर्ख या अज्ञानी शिष्य का गुरु होने की बजाए, बिना शिष्य के रहना उचित है, और किसी राजा का राज्य विहीन रहना उचित होता है, जिसके राज्य और प्रजा, दोनों ख़राब और कमजोर हो।

बगुले से सीखें ये गुण

नीति शास्त्र के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए एक बगुले की भांति अपनी इंद्रियों को पर नियंत्रण रखते हुए, अपने किसी कार्य में अपनी योग्यता, समय की उपलब्धता और स्थान को देखते हुए, अपने लक्ष्यों को पूरा करना चाहिए, अर्थात एकाग्रचित होकर अपने कार्यों को पूरा करना चाहिए, अन्यथा असफलता की संभावना होती है।

मुर्गे से सीखें ये 4 गुण

नीति-सूत्र में जीवन के व्यवहारिक ज्ञान के अनुसार, किसी व्यक्ति को, अपनी संपत्तियों का परिवार के सदस्यों व संबंधियों में उचित प्रकार से बंटवारा करना, सही समय पर जागना, अपने स्वयं के प्रयासों और कठिनाइयों से रोजगार व भोजन प्राप्त करना तथा निडरता पूर्वक रहना और अपना कार्य करना, ये चार गुण मुर्गे से सीखना चाहिए, तभी व्यक्ति जीवन में अवश्य सफलता प्राप्त कर सकता है।

कुत्ते से सीखें ये चार गुण

इस सूत्र के अनुसार, कुत्ते या श्वान में ऐसे 4 गुण होते हैं, जो व्यक्ति के व्यवहारिक जीवन के लिए, बहुत उपयोगी व महत्वपूर्ण होते हैं। कुत्ते के ये 4 गुण हैं, पहला, अपने स्वामी के प्रति वफादारी व ईमानदारी, दूसरा, अपनी जिम्मेदारी या कार्यों को निडरता पूर्वक करें, तीसरा, कितनी भी गहरी नींद में हों, आवश्यकता होने पर या खतरा दिखने पर तुरंत उठ जाएं, चौथा, ज्यादा भूख लगने पर भी यदि खाने को कुछ भी प्राप्त ना हो, तो भी संतोष से रहें।

ये तीन गुण सीखें गधे से

नीति शास्त्र के अनुसार, जीवन में जो मिले, उसमें हमेशा संतुष्ट रहना, अपने कार्यों के लिए, सर्दी, गर्मी, वर्षा की परवाह ना करना, और अपना स्वयं का बोझ खुद उठाना यानि दूसरों पर आश्रित ना होना, ये तीनों गुण हमें गधे से अवश्य सीखना चाहिए। जीवन के ये व्यवहारिक ज्ञान हमारे लिए बहुत उपयोगी होते हैं।


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