तीन सूत्रों को सीख लो नहीं तो दर दर भटकते रहोगे

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महान विद्वान आचार्य चाणक्य ने, अपने नीति-शास्त्र में ऐसी कई नीतियों का वर्णन किया है, जिनका अनुसरण करके व्यक्ति सुख व प्रसन्नतापूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सकता है। महान राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ व अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य ने, जीवन के अनुभवों से प्राप्त गूढ़ रहस्यों का, अपने नीतिशास्त्र, ‘चाणक्य नीति’ में विस्तृत वर्णन किया है। उन्होंने जीवन की कई समस्याओं के समाधान और जीवन में सफलता के कई उपायों का अपनी नीतियों में व्याख्या किया है।

आचार्य का कहना है कि हमें किसी व्यक्ति के उचित परीक्षण के उपरांत ही, उस से मित्रता करनी चाहिए और विवाह करने के लिए, कन्या के कुल की जानकारी लेनी चाहिए ना की उसके सौदर्य की।

आचार्य चाणक्य की कुछ उपयोगी नीतियां इस प्रकार है

घर बनाने का उचित स्थान

इस नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हमें अपने अपना गृह निर्माण ऐसे स्थान पर करना चाहिए, जहां ज्ञानी और विद्वान जन निवास करते हों, जिससे हमें भी ज्ञान और विद्या प्राप्त होती है, धर्म व पुण्य प्राप्त होता है, और हमारा मन किसी भी पाप कर्म की ओर नहीं भटकता है। हमारा गृह निर्माण ऐसे स्थान पर करना चाहिए, जहां कोई वैद्य रहता हो, ताकि आवश्यकता पड़ने पर हमें तत्काल वैद्य की सहायता मिल सके और हमारे रोगों और शारीरिक समस्याओं का उचित उपचार हो सके।

हमें ऐसे स्थान पर घर बनाना चाहिए, जहां जल की भरपूर मात्रा पाई जाती हो, ताकि हमें जल की कमी ना हो और जल के समीप मिलने वाली सभी प्राकृतिक वस्तुओं व संसाधनों का पूरा लाभ हमें प्राप्त हो सके, और ऐसे स्थान पर गृह निर्माण करना चाहिए, जहां कोई धनी व्यक्ति निवास करता हो, जिससे कि हमारे भी व्यापार व्यवसाय में वृद्धि होने की संभावना रहती है।

मित्र के स्वभाव में ना हो ये 4 बातें

किस प्रकार के अवगुणों वाले व्यक्तियों को अपना मित्र कभी नहीं बनाना चाहिए? इस बारे में इस सूत्र में आचार्य चाणक्य ने स्पष्ट किया है कि किसी संकट, समस्या या बुरे वक्त में हमारी सहायता करने वाला व साथ देने वाला ही, हमारा सच्चा साथी व दोस्त होता है, किंतु ऐसा व्यक्ति जिसे कोई भी नीच कार्य करने में शर्म ना हो, वह बेशर्म हो, अशिष्ट हो और उसमें लज्जा का गुण बिल्कुल ना हो, ऐसे व्यक्ति को भूल कर भी अपना मित्र नहीं बनाना चाहिए।

ऐसा व्यक्ति जिसके स्वभाव में उदारता ना हो, प्रेम का भाव ना हो, ऐसे व्यक्ति को कभी मित्र नहीं बनाना चाहिए, जो व्यक्ति अपने किसी भूल को ना मानता हो, गलती का पश्चाताप ना करता हो, और गलती करने पर भी उसके मन में कोई भय ना हो, ऐसे वक्त व्यक्ति से भी मित्रता करना उचित नहीं होता, और इसके अतिरिक्त ऐसा व्यक्ति, जो अपने बुरे स्वभाव और बुरी आदतों की वजह से, अपने परिवार का उचित प्रकार से भरण-पोषण ना करता हो, ऐसे व्यक्ति से भी मित्रता नहीं करनी चाहिए, बल्कि ऐसे सभी व्यक्तियों से हमें दूर रहना चाहिए, इसी में हमारी भलाई होती है।

लड़की का सौदर्य नहीं बल्कि कुल देखकर करें विवाह

इस सूत्र में आचार्य चाणक्य के अनुसार, किसी व्यक्ति को विवाह करने के लिए, लड़की के उच्च कुल, संस्कार व गुणों को देखना चाहिए, ना की उसकी खूबसूरती को। वैसे ज्यादातर लड़के विवाह के लिए, किसी लड़की की खूबसूरती पर ही अधिक ध्यान देते हैं, किंतु आचार्य कहते हैं कि ऐसी कन्या से विवाह करना सर्वथा उचित होता है, जो संस्कारी है, गुणी है और अच्छे स्वभाव वाली है, भले ही वह अधिक खूबसूरत ना हो, क्योंकि यदि अधिक सौंदर्य वाली कन्या संस्कारहीन है, और उसका स्वभाव ठीक नहीं है, तो वह पूरे परिवार के दुख का कारण बनती है, और परिवार को तोड़ देती है, इसलिए किसी व्यक्ति को विवाह करते समय, कन्या के सौंदर्य की बजाय, उसके उच्च कुल व गुणों को प्राथमिकता देनी चाहिए।


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