तेज दिमाग वाले लोग यहाँ से तुरंत भागते है

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आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन के वृहद अनुभव के आधार पर नीति-शास्त्र, चाणक्य नीति की रचना की है। आचार्य चाणक्य कूटनीति और राजनीति के महान विद्वान थे। उनकी नीतियों का अनुसरण करके व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने अपने नीतिशास्त्र में जीवन की कठिनाइयों के निराकरण के संबंध में कई नीतियां दी है, किंतु कुछ ऐसी परिस्थितियों का भी वर्णन किया है, जो हमारे सामने आने पर, वहां से चले जाना या उस स्थान का त्याग कर देना या पीछे हट जाना ही उचित होता है, ऐसी विपरीत परिस्थितियों में पड़ना हमारे लिए हानिकारक व कष्टदायक हो सकता है।

शत्रु के अचानक आक्रमण करने पर

इस सूत्र में आचार्य कहते हैं कि हमें ऐसे स्थान से स्थान का तत्काल त्याग कर देना चाहिए, जब कोई शत्रु अचानक आप पर आक्रमण कर दे क्योंकि, ऐसी स्थिति में दुश्मन अपनी पूरी शक्ति और तैयारियों के साथ आप पर आक्रमण करेगा, और आप उस समय सतर्क नहीं हो पाएंगे और ना ही आप मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार होंगे, और यह परिस्थिति आपके लिए हानिकारक हो सकती है, साथ ही इस स्थिति में वह दुश्मन आप के प्राणों के संकट का कारण भी बन सकता है, इसलिए ऐसे स्थान से हट जाना ही उचित होता है।

झगडा और वाद-विवाद वाले स्थान का

इस सूत्र में आचार्य चाणक्य के अनुसार उस स्थान से भी तत्काल हट जाने में ही हमारी भलाई होती है, जहां पर किन्हीं अन्य व्यक्तियों के मध्य कोई वाद-विवाद या लड़ाई-झगड़ा हो रहा हो क्योंकि, वहां रुकने से किसी अन्य के वाद-विवाद व झगड़े का दुष्परिणाम हमारे ऊपर हो सकता है, जो हमारे लिए कई समस्याओं का कारण हो सकता है।

ऐसे स्थान पर रुके रहने से लड़ाई-झगड़ा करने वाले लोग हमारे ऊपर भी आक्रमण कर सकते हैं, और यह हमारे लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए ऐसे स्थान का भी तत्काल त्याग कर देना उचित होता है।

किसी नीच व्यक्ति के आने पर

आचार्य का कथन है कि किसी नीच और दुष्ट प्रवृत्ति वाले व्यक्ति के साथ रहने पर अन्य लोग आपको भी उस नीच व्यक्ति का साथी समझने लगते हैं, और आपको भी उसके जैसा ही मानने लगते हैं, इसलिए हमें ऐसे स्थान को तुरंत छोड़ देना चाहिए, जहां कोई नीच प्रवृत्ति का व्यक्ति आपके पास आ जाए, ऐसे दुष्ट प्रवृत्ति के व्यक्ति के साथ रहने पर, आप का भी अपमान हो सकता है, और उसकी संगत का दुष्परिणाम आप को भोगना पड़ सकता है, इसलिए ऐसे दुष्ट और नीच प्रवृत्ति के लोगों के आने पर उस स्थान से चले जाना ही उचित होता है।

अकाल वाले स्थान का

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं वाली वस्तुओं के बगैर ज्यादा समय तक जीवित रहना, हमारे लिए संभव नहीं होता है, इसलिए यदि किसी स्थान पर अकाल का प्रभाव हो, तो ऐसे स्थान का तुरंत त्याग कर देना उचित होता है, क्योंकि ऐसे स्थान में रहने से हमारे जीवन-यापन की विकट समस्या हो सकती है।

अकाल वाले स्थान पर जीवन की मूलभूत आवश्यकता और सुविधाओं के उपलब्ध ना होने के कारण, हमारे प्राणों का भी संकट हो सकता है, इसलिए अपने जीवन को बचाने के लिए, अकाल वाले स्थान को छोड़ देने में ही हमारा कल्याण होता है।


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